Incarnation Day Of Sant Shri Asharamji Bapu Vs “Vishwa Sewa Divas”

केशवानंदजी आदि तथा पूर्वकालीन संत जैसे स्वामी विवेकानंदजी, नरसिंह मेहता, संत एकनाथजी आदि पर भी कई दुष्टों ने आरोप लगाये थे। आरोप लगानेवालों ने तो भगवान को भी नहीं बख्शा था। भगवान श्रीकृष्ण पर भी स्यमंतक मणि चुराने का आरोप और अन्य कई प्रकार के आरोप लगाये गये थे।

Asaramji Bapu

Incarnation Day संत अवतरण

Sant Shri Asaram Bapuji’s Incarnation Day (Avataran Diwas) is celebrated as Vishwa Seva Diwas all over the world by millions of followers of Pujya Bapuji. On the occasion of Avataran Divas, Pujya Bapuji’s sadhaks do a lot of welfare activities across the world.

Exceeding number 425 ashrams, 1400 Shri Yoga Vedanta Sewa Samitis (SYVSS), 17,000 Bal Sanskara Kendra (BSK), thousands of Yuva Sewa Sanghs (YSS), Mahila Utthan Mandals (MUM) celebrate H.H. Asharam Bapuji’s (referred to as ‘Bapuji’) incarnation day every year as ‘Vishwa Sewa Diwas’ – a day meant to serve the humanity by keeping in mind ‘Vasudhaiv kutumbukum’ (वसुधैव कुटुम्बकम् ) i.e. “the whole world is one family”. The day is celebrated amongst Bapuji’s followers with fervor and gaiety in many ways.

‘Vishwa Sewa Divas’ (Worldwide Selfless-service Day) – Incarnation Day of Sant Shri Asharamji Bapu.

Sant Shri Asharamji Ashram:

Main ashram was established on January 29, 1972 in Ahmedabad…

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श्री हनुमान मंत्र रक्षा कवच

बिना किसी अपेक्षा के सेवा करने से व्यक्ति सिर्फ भक्त ही नहीं, भगवान बन सकता है।

Asaramji Bapu

श्री हनुमान जयंती  : १० अप्रैल (उपवास) – ११ अप्रैल (उत्सव)

प्राणों की रक्षा हेतु हनुमान मंत्र / रक्षा कवच |

हनुमानजी जब लंका से आये तो राम जी ने उनको पूछा कि रामजी के वियोग में सीताजी अपने प्राणो की रक्षा कैसे करती हैं ?

तो हनुमान जी ने जो जवाब दिया उसे याद कर लो । अगर आप के घर में कोई अति अस्वस्थ है, जो बहुत बिमार है, अब नहीं बचेंगे ऐसा लगता हो, सभी डॉक्टर व दवाईयाँ भी जवाब दे गईं हों, तो ऐसे व्यक्ति की प्राणों की रक्षा इस मंत्र से करो..उस व्यक्ति के पास बैठकर ये हनुमानजी का मंत्र जपो..तो ये सीता जी ने अपने प्राणों की रक्षा कैसे की ये हनुमानजी के वचन हैं….

नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट ।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ॥

इसका अर्थ भी समझ लीजिये ।

‘ नाम पाहरू दिवस निसि ‘…

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वायु तत्व के प्रतीक हैं हनुमानजी

धन्य हुए हम जो ऐसी भारतीय संस्कृति में जन्मे और ऐसे हिन्दू धर्म के संस्कारों से हमारा सिंचन हुआ, जहाँ प्रभु श्री राम, राम भक्त हनुमान और परम पूजनीय आशाराम बापूजी जैसी दिव्य आत्माएं अवतरित हुई और जन-मानस के कल्याण हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया !

Asaramji Bapu

hanuman jayanti-Tvmehm soham

जन्म मृत्यु के बीच में जीवन नामक महत्वपूर्ण घटना घटती है। जन्म तो जानवरों का भी होता है, लेकिन उनमें जीवन नहीं घटता। यह संभावना सिर्फ मनुष्य में है। जन्म को जीवन में बदलने का एक उदाहरण हनुमानजी का है। कई लोग पूछते हैं कि हनुमानजी मनुष्य हैं या बंदर। कोई उन्हें मानने को तैयार नहीं है तो कोई उन्हें लेकर अनुभूति के कई प्रसंग सुना सकता है। कहीं वे सेवा के प्रतिमान हैं तो कहीं जीवन प्रबंधन गुरु। उन्हें वानर कहा गया है, अर्थात् वन में रहने वाले नर। इसलिए वे मनुष्य की श्रेष्ठतम स्थिति का प्रतीक हैं। वे पशु की दिव्यता को भी झलकाते हैं।

हिंदू धर्म ने प्रकृति और प्राणी को बड़े वैज्ञानिक ढंग से जोड़ा है। पंचतत्व की कल्पना इसी का प्रमाण है। पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, आकाश और मनुष्य का शरीर, सब संयुक्त हैं। हनुमानजी वायु तत्व के प्रतीक हैं। ये सब अपना-अपना हिस्सा हमें…

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राम भक्त हनुमान

राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम ।।

Asaramji Bapu

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निष्काम सेवा भक्ति, श्री राम भक्त हनुमान की !!

श्री हनुमान जयंती : १० अप्रैल (उपवास) – ११ अप्रैल (उत्सव)

भारतीय-दर्शन में सेवा भाव को सर्वोच्च स्थापना मिली हुई है, जो हमें निष्काम कर्म के लिए प्रेरित करती है। इस सेवाभाव का उत्कृष्ट उदाहरण हैं केसरी और अंजनी के पुत्र महाबली हनुमान। उनका अवतरण दिवस चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इंद्र द्वारा वज्र से प्रहार करने से उनकी हनु (ठुड्डी) टूट जाने के कारण ही उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। प्रहार से मूर्छित हनुमान को जल छिड़ककर पुन: सचेत कर प्रत्येक देवता ने उनको अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र दिए जिसके कारण उनका नाम महावीर हुआ।

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हनुमान जी ने ही हमें यह सिखाया है कि बिना किसी अपेक्षा के सेवा करने से व्यक्ति सिर्फ भक्त ही नहीं, भगवान बन सकता है। हनुमान जी का चरित्र रामकथा में इतना प्रखर है कि उसने राम के आदर्र्शो को गढ़ने में मुख्य कड़ी…

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